Sunday, 29 May 2016

*एक राजस्थानी हास्य कविता*

दर्द गोडा रो..
संग मोडा रो..
करणो होडा रो...
छानो कोनी रवै....

खायडो खिचड...
चिपेडो चिँचड...
आदत को लिचड...
छानो कोनी रवै...

घराँ बाजियोडा सोट...
छिटकायोडा होठ...
जाटणी रो रोट...
छानो कोनी रवै...

माँगियोडा बूँट...
खायोडी सूँठ..
.पावलो ऊँट...
छानो कोनी रवै...

फौजी की फीँत...
भोपी रो गीत...
झुठी प्रीत...
छानी कोनी रवै....

आँधी आती..
गाँव का बराती..
मतलब को साथी...
छानो कोनी रवै....

भाँग खायोडो...
दारू पीयोेडो..
अर माँ को बिगाडियोेडो...
छानो कोनी रवै....

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