Tuesday, 26 January 2016

तेजाजी कथा

वीर तेजाजी का जन्म 29 जनवरी 1074 को खरनाल नागौर के धौल्या जाट कुल में ताहर के घर हुआ ।माता सुगना के लाड प्यार से जब बड़े हुए तो एक दिन भाभी ने खाने को लेकर ताना मार दिया ।तेजाजी अपनी पत्नी को लेने रायमल्जी मुथा के वहाँ गांव पनेर अजमेर पहुंचे ।तभी पत्नी पेमल की सहेली लिछमा रोती हुई आई कि उसकी गायें चोर ले गए ।तेजाजी लीलण घोड़ी सवार हो गायें लेने जाते है ।रास्ते में एक काला नाग घास फूस में जल रहा था ; तेजाजी ने बाहर निकाला तो नाग बोले आज मेरे जीवन की मुक्ति हो रही थी आपने बचा कर अन्याय किया अब मुझे और कई साल धरती पे पेट रेंगते फिरना पड़ेगा । मैं नाराज हूँ आपको डचूंगा तो तेजाजी ने कहा अभी मै गायों को बचाने के पुण्य काम जा रहा हुँ।मेरा वादा है की मैं वापस आऊंगा और आप डच लेना । तेजाजी ने चोरों से गायें छुड़वाई ,वापस आए और नाग ने डच लिया । जाते जाते नाग ने भी वचन दिया कि हे महापुरुष जो मौत से भी वादा कर गया उन्हें मैं भी नमन करता हुँ और वचन देता हुँ कि भविष्य में मेरा डचा भी आपके नाम धागा मात्र बांधने से ठीक होगा ।ऐसी विचारधारा से आज तेजाजी मारवाड़ मालवा मेवात हरियाणा के लोक देवता है।

   जय जय तेजाजी ।


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