Saturday, 12 March 2016

विष्णु अवतार गुसाई महाराज

नागौर जिले के जुन्जाला गाँव में स्थित गुसाईंजी मंदिर
गुसाईंजी हिन्दुओं के देवता हैं। इनका एक प्रासिद्ध मंदिर नागौर जिले के जुन्जाला गाँव में स्थित है। यद्यपि गुसाईंजी हिन्दुओं के देवता हैं परन्तु मुसलमान भी इनको मानते हैं।
एक समय राजा बलि इस धरती पर राज करता था। राजा बलि ने अश्वमेघ यग्य और अग्नि होम किए. उसने इस तरह ९९ यज्ञ संपन्न कर दिए. राजा बलि का यश चारों और फैलने लगा और वह इन्द्रलोक का राजा बनने की सोचने लगा. राजा बलि ने १०० वें यज्ञ का आयोजन रखा और इसके लिए निमंन्त्रण भेजे. सारी नगरी को इस अवसर के अनुरूप सजाया गया। सारी नगरी को न्योता दिया गया।[1]
भगवान ने सोचा कि राजा बलि घमंड में आकर कहीं इन्द्र का राज न लेले. भगवान ने बावन अवतार का रूप धारण किया। अपना शरीर ५२ अंगुल के बराबर लंबा किया और राजा बलि की नगरी के समीप धूना जमा लिया। राजा बलि ने यज्ञ शुरू किया और मंत्रियों को हुक्म दिया कि नगरी के आस पास कोई भी मनुष्य यहाँ आए बिना न रहे. मंत्रियों ने छानबीन की तो पता चला कि भगवान रूप बावन अपनी जगह बैठा है। मंत्रियों के कहने पर वह नहीं आए. तब राजा बलि ने ख़ुद जाकर महाराज से निवेदन किया। महाराज ने राजा से कहा कि मैं आपके नगर में तब प्रवेश करुँ जब मेरे पास कम से कम तीन पांवडा (कदम) जमीन मेरे घर की हो. इस पर राजा बलि को हँसी आ गई और कहा की शर्त मंजूर है। [2]
राजा बलि का वचन पाकर भगवान ने अपनी देह को इतना लंबा किया कि पूरी पृथ्वी को दो पांवडा (कदम) में ही नाप लिया। और पूछा कि तीसरा कदम कहाँ रखू. इस पर राजा बलि घबरा गए और थर-थर कांपने लगे. राजा बलि ने कहा कि यह तीसरा कदम मेरे सर पर रखें. इस पर भगवान ने तीसरा पैर राजा बलि के सर पर रख कर उसको पाताल भेज दिया. [3]
कहते हैं कि जब भगवान ने वामन अवतार धारण कर पृथ्वी का नाप किया तो पहला कदम मक्का मदीना में रखा गया था। जहाँ अभी मुसलमान पूजा करते हैं और हज करते हैं। दूसरा कदम कुरुक्षेत्र में रखा था जहां अभी पवित्र नहाने का सरोवर है। तीसरा पैर ग्राम जुन्जाला के राम सरोवर के पास रखा जहाँ आज मन्दिर है। तीर्थ राम सरोवर में हिंदू और मुसलमान दोनों धर्मों के लोग आते हैं। हिंदू इसे गुसांईजी महाराज कहते हैं तो मुसलमान इसे बाबा कदम रसूल बोलते हैं। [4]
यह मन्दिर एतिहासिक दृष्टि से बहुत पुराना है। यहाँ पर हर साल एक तो नव रात्रा के पहले दिन चैत्र सुदी १ व २ को तथा दूसरा आसोज सुदी १ व २ को मेला लगता है। यहाँ राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, गुजरात, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश आदि राज्यों से यात्री आते हैं। [5]
बाबा रामदेवजी के परिवार वाले भी यहाँ अपनी जात का जडूला चढाने जुन्जाला आया करते थे। यहाँ मन्दिर में एक पुराना जाल का पेड़ है जिसके नीचे बाबा रामदेवजी का जडूला उतरा हुआ है। इसलिए जो लोग रामदेवरा जाते थे वह सब यात्री जुंजाला आने पर ही उनकी यात्रा पूरी मानी जाती है। इसलिए भादवा और माघ के महीने में मेला लग जाता है।

Tuesday, 23 February 2016

अभिनेता संजय दत्त

हिन्दुतान का क़ानून
जिस कि अभिनेता संजय दत्त 25 दिन अंदर तो 10 दिन बाहर करते करते जेल की सजा काट रहे है और अब अच्छे व्यवहार को देखते हुए 25 फ़रवरी को आजाद हो रहे है।
            बेशक इसमे किसी को कोई आपत्ति नही लेकिन किसी गरीब को भी ऐसा मौका मिल जाये जो कम पढ़े लिखे या अपरिपक्व दिमाग के भी होते है ।संजय दत्त तो एक हाई फ़ाई पर्सन और बहुत बुद्धिमान आदमी भी है।
         अगर गरीब जेल प्रशासन के नजर न चढ़े या वह प्रार्थना के लिए व्यय न कर सके तो सरकारो का भी यह कर्तव्य नहीं बनता कि उसे कानूनी सहायता उपलब्ध करवाये।
  जिससे सभी को समानता का मेसेज जाये ।
सम्माननीय न्यायलय का आदेश सभी को स्वीकार्य है।
यह मात्र कानूनी पेचीदगी और हमारी संवेदना की बात है ।

Thursday, 28 January 2016

श्री कृष्णा उपदेश

एक समय की बात है श्री कृष्णा और अर्जुन कहीँ जा रहे थे रास्ते में उन्हें एक गरीब ब्राह्मण दिखा जो भिक्षा मांग के पेट भरता था अर्जुन को दया आ गई और दो मोहरे उस ब्राह्मण को देदी लेकिन थोड़ी देर बाद उस ब्राह्मण को चोर लूट ले जाते है ।एक दिन फिर वही ब्राह्मण भीख मांगते दीखता है तो तरस खाकर अर्जुन अबकी बार उसे एक बेशकीमती जादुई मणि देते है । ब्राह्मण उस मणि को घर में एक फूटे घड़े में रख देता है ताकि अबकी बार फिर चोर न ले जा सके लेकिन किस्मत भी ब्राह्मण का पीछा नहीँ छोड़ती है । आगे एक दिन उसकी पत्नि नदी में जल लेने जाती है और उसका घड़ा फुट गया ।वह घर आकर उस फूटे घड़े को पानी लाने ले जाती है जिसमे ब्राह्मण ने मणि रखी थी । ज्योहि जल भरने को घड़ा टेढा किया त्योंही उसमे से मणि लुढ़क जाती है और उसे मछली निगल गई । ब्राह्मण को पता चला तो खूब रोया पछताया और बेचारा फिर भीख मांगने लगा ।
                अबकी बार जब उसे हरी एवम् अर्जुन ने भीख मांगते देखा तो श्री कृष्ण ने उसे दो रूपये दिए ।अर्जुन भौचकै हो कर बोले भगवन मैंने दो बार इसकी दरिद्रता दूर करने के लिए उतना कुछ दिया तब भी कोई फर्क न्ही पडा और आप मात्र दो रूपये दे रहे है इससे क्या इसकी दरिद्रता दूर होगी ।
    कृष्ण ने कहा इसके पीछे जाओ और देखते जाओ अर्जुन ने ऐसा ही किया । ब्राह्मण सोचता जा रहा था कि दो रूपये से क्या होगा ;एक समय का खाना भी नही खा सकेंगे ऐसा सोचता सोचता वह नदी पर पानी पीने चला गया तभी एक मछुआरा एक मछली पकड़ झोली में डालने लगा ।ब्राह्मण को दया आ गई और दो रूपये देकर मछली को मछुआरे से आजाद करवाया ।
        ब्राह्मण मछली को नदी जल में छोड़ ही रहा था कि तड़पती मछली के मुख से वही मणि गिरी ।ब्राह्मण उसे देख चिल्लाया मिल गया मिल गया । तभी वही दोनों चोर भी नदी पर जल कार्य से आये हुए थे जो मिल गया मिल गया कि आवाज से घबरा गए कि ब्राह्मण उन्हें पहचान गया और सुबह राजा से  शिकायत करेगा । दोनों चोर ब्राह्मण के पैर पकड़ माफ़ी मांग कर दो मोहरे लौटा देते है ।
       अर्जुन ने यह सारा नजारा देख हरि को यह कथा बताई तो श्री कृष्णा बोले -----------
           धन दौलत से नसीब नही बदलता ;नसीब को सोच ही बदल सकती है ।नेकी बदल सकती है जैसे दो बार ब्राह्मण ने धन स्वार्थ किया लेकिन तीसरी बार सोचा ये कुछ नहीं है, इससे थोडा नेक काम कर लूँ ।
       वही नेकी ब्राह्मण का काम कर गई ।

Tuesday, 26 January 2016

देख कर ही सीखते है ।

एक समय एक गांव में एक बूढी विधवा,उसका बेटा,बहू और एक पोता रहते थे । बेटा रोजाना अपने काम पर निकल जाता और पोता पढ़ने चला जाता । बहू अपनी सासु माँ को मिट्टी के फूटे बर्तन से बनी प्लेट में खाना देती थी। उस बूढी माँ का न आदर था न सम्मान ।उसके नसीब में अब था बासी खाना झिड़की,ताना और धक्के ।समय पंख लगा के निकल गया ,पोता भी बड़ा हुआ उसके भी बहू आई और वह भी पिता के साथ काम पर जाने लगा ।
               उस घर के रीति रिवाज ढर्रा अभी भी सुधरा नहीं
उस बूढ़ी माँ को उसी बर्तन में खाना वही जिल्लत मिल रही थी ।छोटी बहू किसी संस्कारी पिता की औलाद थी ,वह यह दृश्य देख जाने कहाँ खो गई और एक नए संसार को देख रही थी कि मानव सभ्यता में ऐसा भी होता है ! फिर भी पिता के संस्कारों और छोटी हुँ ये सोचते हुए उसने यह चुगली(काना-फूसी) नहीँ की ।
    समय फिर गुजरता गया और बूढी माँ का स्वर्गवास हो गया ।उसका बारहवा वगरैह भी हो गया ।अब पोते की बहू और उसकी सास में प्रेम वार्ता होने लगी कि बेटा ऐसा करना ,वैसा करना और हाँ वो बूढी दादी वाला मिट्टी का टुकड़ा बाहर गली में फैंक देना । छोटी बहू बोली क्यों सासु मां तो जवाब मिला कि दादी तो चली गई अब इसमे किसे खिलाना है ?
              पोते की बहू ने मासूमियत से कहा सासु माँ कल आप भी बूढी होगी, खाट जकड़ लेगी---तब आपके यह बर्तन काम आएगा ।
    सीख---बच्चों को वो करके दीखाओ जो हम उनसे चाहते हो ।

तेजाजी कथा

वीर तेजाजी का जन्म 29 जनवरी 1074 को खरनाल नागौर के धौल्या जाट कुल में ताहर के घर हुआ ।माता सुगना के लाड प्यार से जब बड़े हुए तो एक दिन भाभी ने खाने को लेकर ताना मार दिया ।तेजाजी अपनी पत्नी को लेने रायमल्जी मुथा के वहाँ गांव पनेर अजमेर पहुंचे ।तभी पत्नी पेमल की सहेली लिछमा रोती हुई आई कि उसकी गायें चोर ले गए ।तेजाजी लीलण घोड़ी सवार हो गायें लेने जाते है ।रास्ते में एक काला नाग घास फूस में जल रहा था ; तेजाजी ने बाहर निकाला तो नाग बोले आज मेरे जीवन की मुक्ति हो रही थी आपने बचा कर अन्याय किया अब मुझे और कई साल धरती पे पेट रेंगते फिरना पड़ेगा । मैं नाराज हूँ आपको डचूंगा तो तेजाजी ने कहा अभी मै गायों को बचाने के पुण्य काम जा रहा हुँ।मेरा वादा है की मैं वापस आऊंगा और आप डच लेना । तेजाजी ने चोरों से गायें छुड़वाई ,वापस आए और नाग ने डच लिया । जाते जाते नाग ने भी वचन दिया कि हे महापुरुष जो मौत से भी वादा कर गया उन्हें मैं भी नमन करता हुँ और वचन देता हुँ कि भविष्य में मेरा डचा भी आपके नाम धागा मात्र बांधने से ठीक होगा ।ऐसी विचारधारा से आज तेजाजी मारवाड़ मालवा मेवात हरियाणा के लोक देवता है।

   जय जय तेजाजी ।